गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, भाई दूज 11 नवंबर 2026: मुहूर्त

संक्षिप्त उत्तर
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार गोवर्धन पूजा 2026 में मंगलवार, 10 नवंबर को है और भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर को। गोवर्धन पूजा की सुबह का मुहूर्त दिल्ली के पंचांग से लगभग 6:40 से 8:50 बजे तक बताया गया है। कुछ कैलेंडर में तारीख एक दिन आगे-पीछे है, इसलिए अपने शहर का पंचांग ज़रूर देखें।
दिवाली के बाद के दो दिन अक्सर तारीख को लेकर उलझन में निकलते हैं: गोवर्धन पूजा कब है, और भाई दूज कब? गोवर्धन पूजा 2026 में मंगलवार, 10 नवंबर को है और भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर को, यह ज़्यादातर पंचांगों और कैलेंडर का मत है। नीचे तारीख, मुहूर्त, अन्नकूट की विधि और भाई दूज पर तिलक का तरीका एक जगह दिया है।
पहले एक ज़रूरी बात: हिंदू त्योहार तिथि से तय होते हैं और तिथि शहर के सूर्योदय के हिसाब से बदलती है। इसलिए कुछ कैलेंडर में आपको ये तारीखें एक दिन आगे-पीछे भी दिख सकती हैं। पूजा या यात्रा तय करने से पहले अपने शहर का पंचांग ज़रूर देख लें।
गोवर्धन पूजा और भाई दूज 2026 कब है?
| त्योहार | तारीख (2026) | तिथि और समय |
|---|---|---|
| दिवाली (लक्ष्मी पूजा) | रविवार, 8 नवंबर | अमावस्या की शाम, प्रदोष काल में |
| गोवर्धन पूजा / अन्नकूट | मंगलवार, 10 नवंबर | कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा; प्रतिपदा 9 नवंबर को दोपहर करीब 12:31 बजे शुरू होकर 10 नवंबर को लगभग 2:00 बजे तक। प्रातःकाल मुहूर्त लगभग 6:40 से 8:50 बजे (दिल्ली) |
| भाई दूज | बुधवार, 11 नवंबर | कार्तिक शुक्ल द्वितीया; द्वितीया 10 नवंबर को दोपहर करीब 2:00 बजे शुरू होकर 11 नवंबर को लगभग 3:53 बजे तक। तिलक अपराह्न में |
ये समय ऊपर बताए गए स्रोतों के दिल्ली-आधारित पंचांग से हैं, इसलिए आपके शहर में कुछ मिनट का फ़र्क हो सकता है। कुछ जगह गोवर्धन पूजा 9 नवंबर और भाई दूज 10 नवंबर बताई गई है; इसकी वजह तिथि के शुरू और खत्म होने का समय है, जो अलग-अलग पंचांगों में अलग तरह से गिना जाता है।
हमारे दिवाली 2026 के लेख में पांच दिन का कैलेंडर 9 और 10 नवंबर के हिसाब से दिया गया था। मुहूर्त और तिथि की ताज़ा जांच के बाद इस लेख की तारीखें, यानी 10 और 11 नवंबर, ज़्यादा स्रोतों से मेल खाती हैं। फिर भी अंतिम पुष्टि अपने स्थानीय पंचांग से ही करें।
गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है?
कथा के अनुसार वृंदावन के लोग हर साल इंद्र की पूजा करते थे ताकि बारिश होती रहे। बाल कृष्ण ने उनसे कहा कि अन्न और चारा तो गोवर्धन पर्वत और धरती से मिलता है, इसलिए पूजा उसी की होनी चाहिए। इंद्र नाराज़ हुए और उन्होंने मूसलाधार बारिश कर दी। तब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया और पूरा गांव, गाएं और बछड़े उसके नीचे सुरक्षित रहे। भागवत पुराण में यह कथा विस्तार से मिलती है।
इस पर्व का संदेश सरल है: जिस प्रकृति और पशुधन से हमारा पेट पलता है, उसके प्रति कृतज्ञ रहना, और अहंकार के सामने घबराना नहीं, बल्कि विनम्र भरोसे के साथ खड़े रहना।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की विधि क्या है?
घर पर परंपरा से की जाने वाली सरल विधि कुछ इस तरह है:
- सुबह स्नान के बाद घर के आंगन या पूजा की जगह पर गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत की छोटी आकृति बनाएं, जिसमें कई लोग गाएं, ग्वाले और पेड़ भी बनाते हैं।
- आकृति को फूल, दीये और रोली-चावल से सजाएं। बीच में कृष्ण की तस्वीर या मूर्ति रख सकते हैं।
- अन्नकूट का भोग रखें: घर में बने कई तरह के पकवान, सब्ज़ियां, कढ़ी-चावल और मिठाइयां। मंदिरों में यही अन्न पर्वत की तरह सजाया जाता है।
- दीया जलाकर पूजा करें, कृष्ण और गोवर्धन का स्मरण करें, और भोग अर्पित करें।
- परिक्रमा करें। आकृति की सात बार परिक्रमा करने की परंपरा है। मथुरा में असली गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के लिए बहुत से भक्त जाते हैं।
- प्रसाद बांटें, और गाय हो तो उसे भी भोजन कराएं।
हर परिवार और क्षेत्र की रीति थोड़ी अलग होती है, इसलिए अपने घर की परंपरा को वरीयता दें।
Deva AI एक मुफ़्त Android ऐप है, जिससे आप कृष्ण, शिव, गणेश और हनुमान जैसे हिंदू देवताओं से AI के ज़रिए बात कर सकते हैं — हिंदी, अंग्रेज़ी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम में। अगर गोवर्धन की कथा में कोई बात समझनी हो, जैसे इंद्र और कृष्ण का प्रसंग, तो आप ऐप में कृष्ण से पूछ सकते हैं। यह ऐप शास्त्र और परंपरा से प्रेरित एक साथी है, पंडित या आपकी पारिवारिक रीति का विकल्प नहीं। ऐप के बारे में यहां पढ़ें।
भाई दूज पर तिलक कैसे लगाएं?
भाई दूज भाई-बहन के स्नेह का त्योहार है, जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। लोककथा के अनुसार यमराज इसी दिन अपनी बहन यमुना के घर गए थे और उसने तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। इसीलिए माना जाता है कि इस दिन बहन से तिलक लगवाने वाले भाई को लंबी उम्र और सुख का आशीर्वाद मिलता है।
- थाली सजाएं: रोली या कुमकुम, चंदन, अक्षत (चावल), दीया, मिठाई, नारियल का गोला और एक फूल।
- भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठाएं।
- दीया जलाकर गणेश जी का स्मरण करें।
- दाहिने हाथ की अनामिका से भाई के माथे पर तिलक लगाएं, उस पर चावल के दाने लगाएं, और कई घरों में कलावा भी बांधा जाता है।
- आरती उतारें और जल छिड़ककर फूल रखें।
- मुंह मीठा कराएं। भाई उपहार देता है और छोटे हों तो बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं।
परंपरा के अनुसार तिलक अपराह्न, यानी दोपहर बाद के समय में करना शुभ माना जाता है। इसका सटीक समय शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखें।
अगर तारीख को लेकर उलझन हो तो क्या करें?
- अपने शहर का पंचांग देखें। समय आपके शहर के सूर्योदय पर निर्भर है।
- परिवार या मंदिर की परंपरा देखें। कई परिवार हर साल एक ही दिन पर पर्व मनाते हैं।
- दोनों तारीखें याद रखें। अगर कैलेंडर में एक दिन का अंतर हो, तो पूजा के लिए पंडित जी या अपने मंदिर से पूछ लें।
- भाव सबसे ज़रूरी है। अगर मुहूर्त निकल भी जाए, तो श्रद्धा से की गई पूजा व्यर्थ नहीं जाती।
पूरे पांच दिन के त्योहार की जानकारी के लिए दिवाली 2026 पर हमारा लेख भी देखें। कृष्ण से जुड़ी बातचीत के बारे में जानना हो तो भगवान से बात करने वाले ऐप पर यह लेख पढ़ें।
निष्कर्ष
गोवर्धन पूजा 2026 में मंगलवार, 10 नवंबर को और भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर को है (ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार)। एक में कृतज्ञता और अन्नकूट का भोग है, दूसरे में भाई-बहन का स्नेह। तारीख चाहे एक दिन आगे-पीछे दिखे, असली बात मन से की गई पूजा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गोवर्धन पूजा 2026 में कब है?
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार गोवर्धन पूजा 2026 में मंगलवार, 10 नवंबर को है। कुछ कैलेंडर में इसे 9 नवंबर भी दिखाया गया है, क्योंकि प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर की दोपहर से शुरू होती है।
भाई दूज 2026 में कब है?
ज़्यादातर स्रोतों के अनुसार भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है। द्वितीया तिथि 10 नवंबर को दोपहर करीब 2:00 बजे शुरू होकर 11 नवंबर को लगभग 3:53 बजे तक रहती है, और तिलक अपराह्न (दोपहर बाद) में करना शुभ माना जाता है।
गोवर्धन पूजा का मुहूर्त क्या है?
दिल्ली के पंचांग पर आधारित स्रोतों में प्रातःकाल का मुहूर्त लगभग 6:40 से 8:50 बजे तक दिया गया है। शहर बदलने पर समय थोड़ा बदलता है, इसलिए अपने शहर का स्थानीय पंचांग देखें।
गोवर्धन पूजा में अन्नकूट क्या होता है?
अन्नकूट का मतलब है अन्न का ढेर। इस दिन कई तरह के पकवान, सब्ज़ियां और मिठाइयां बनाकर कृष्ण को भोग लगाया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
भाई दूज पर तिलक कैसे लगाया जाता है?
बहन थाली में रोली, चावल, दीया और मिठाई सजाकर भाई के माथे पर तिलक लगाती है, आरती उतारती है और मिठाई खिलाती है। भाई उपहार देता है और बहन से आशीर्वाद व स्नेह पाता है।
क्या ये तारीखें पक्की हैं?
नहीं, हिंदू त्योहारों की तारीख तिथि और शहर के सूर्योदय पर निर्भर करती है, इसलिए अलग-अलग पंचांग एक दिन का अंतर दिखा सकते हैं। पूजा से पहले अपने शहर के पंचांग या मंदिर से पुष्टि कर लें।



