तुलसी विवाह 2026: 21 नवंबर, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

संक्षिप्त उत्तर
तुलसी विवाह 2026 में शनिवार, 21 नवंबर को है। कार्तिक शुक्ल द्वादशी सुबह करीब 6:31 बजे से लगती है और शाम का शुभ मुहूर्त ज़्यादातर पंचांगों में लगभग 5:24 से 8:46 बजे (IST) बताया गया है। इस दिन तुलसी का विवाह शालिग्राम या कृष्ण रूप में विष्णु से किया जाता है। समय शहर और पंचांग के अनुसार बदलता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग से पुष्टि करें।
आंगन की तुलसी रोज़ पूजी जाती है, पर साल में एक शाम वह दुल्हन बनती है। तुलसी विवाह 2026 में शनिवार, 21 नवंबर को है, यानी कार्तिक शुक्ल द्वादशी के दिन। द्वादशी तिथि सुबह करीब 6:31 बजे से शुरू होती है और शाम का शुभ मुहूर्त ज़्यादातर पंचांगों में लगभग 5:24 से 8:46 बजे (IST) बताया गया है। तिथि और सूर्यास्त का समय हर शहर में बदलता है, इसलिए इस लेख के सभी समय पंचांग पर निर्भर हैं और अपने शहर के पंचांग से मिला लेना ज़रूरी है।
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तुलसी विवाह 2026 की तारीख और मुहूर्त क्या है?
| बात | जानकारी (2026) |
|---|---|
| देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी | शुक्रवार, 20 नवंबर |
| तुलसी विवाह (कार्तिक शुक्ल द्वादशी) | शनिवार, 21 नवंबर |
| द्वादशी तिथि शुरू | 21 नवंबर, सुबह करीब 6:31 बजे |
| शाम का शुभ मुहूर्त (प्रदोष) | लगभग 5:24 से 8:46 बजे (IST), कई पंचांगों के अनुसार |
| दिल्ली के लिए मुहूर्त | थोड़ा छोटा, करीब 5:25 से 7:49 बजे |
| कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली | मंगलवार, 24 नवंबर |
अलग-अलग पंचांगों में समय में कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटे तक का फ़र्क मिलता है। 21 नवंबर की तारीख हमारे देखे स्रोतों में एक जैसी है, पर कुछ परिवार एकादशी, यानी 20 नवंबर को भी विवाह करते हैं। जहां उलझन हो, वहां अपने पंडित जी या स्थानीय मंदिर की बात मानें।
तुलसी विवाह क्या है?
तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे का विवाह शालिग्राम पत्थर या कृष्ण रूप में विष्णु से कराया जाता है। हिंदू घरों में तुलसी को लक्ष्मी का रूप माना जाता है, और हर सुबह-शाम उसे जल चढ़ाया जाता है और दीया दिखाया जाता है। इस एक दिन उसे लाल चुनरी, चूड़ियां और बिंदी से दुल्हन की तरह सजाया जाता है।
यह पर्व देवउठनी एकादशी के ठीक बाद आता है, जब मान्यता के अनुसार विष्णु चार महीने की योगनिद्रा (चातुर्मास) से जागते हैं। इसीलिए तुलसी विवाह को विवाह के मौसम की शुरुआत भी माना जाता है, और कई परिवार इसके बाद ही शादियों की बात आगे बढ़ाते हैं।
तुलसी विवाह की कथा क्या है?
पुराणों में वृंदा की कथा मिलती है। वृंदा विष्णु की परम भक्त थीं और उनका विवाह शक्तिशाली असुर जलंधर से हुआ था। वृंदा के पतिव्रत की शक्ति से जलंधर इतना बलवान हो गया कि देवता भी उसे हरा नहीं पा रहे थे। विष्णु ने जब उस सुरक्षा को भंग किया, तब जलंधर पराजित हुआ। दुख में वृंदा ने विष्णु को पत्थर बन जाने का शाप दिया, और इसी से वे शालिग्राम रूप में पूजे जाते हैं। वृंदा को आगे चलकर तुलसी के पौधे के रूप में सम्मान मिला। कथा के रूप क्षेत्र और ग्रंथ के अनुसार थोड़े अलग मिलते हैं।
हर साल तुलसी और शालिग्राम का विवाह इसी रिश्ते की याद है। ज़्यादातर परिवार इससे भक्ति और उस पौधे के प्रति आदर की सीख लेते हैं जो घर के बीच में बसा है।
घर पर तुलसी विवाह की पूजा विधि क्या है?
रीति हर परिवार और क्षेत्र में थोड़ी अलग होती है। नीचे आम तौर पर की जाने वाली सरल विधि है; अपने घर की परंपरा को वरीयता दें।
- जगह साफ़ करें। तुलसी के आसपास सफ़ाई करें और छोटी-सी रंगोली बनाएं। वृंदावन (तुलसी चौरा) हो तो उसे रंग या गेरू से सजा लें।
- मंडप बनाएं। कई घरों में चार गन्ने खड़े करके तुलसी के ऊपर मंडप बनाया जाता है, जिसे गेंदे की माला और आम के पत्तों से सजाते हैं।
- तुलसी को दुल्हन की तरह सजाएं। लाल चुनरी या साड़ी, चूड़ियां, बिंदी, हल्दी और कुमकुम चढ़ाएं।
- विष्णु को स्थापित करें। तुलसी के पास शालिग्राम, या कृष्ण-विष्णु की छोटी मूर्ति या तस्वीर रखें और उन्हें पीला वस्त्र और माला पहनाएं।
- दीप और धूप जलाएं। घी का दीया जलाएं, फूल, फल और धूप अर्पित करें।
- विवाह की रस्म करें। धागे या माला से दोनों को जोड़ें, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसा विष्णु का मंत्र जपें, और परिवार की रीति हो तो मंगलाष्टक या गीत गाएं। कई घरों में प्रतीकात्मक कन्यादान और छोटी आरती भी होती है।
- प्रसाद बांटें। गन्ना, फल और मिठाई परिवार और पड़ोसियों में बांटें।
पूरा आयोजन संभव न हो तो सरल रूप भी उतना ही सच्चा है: एक दीया, विष्णु मंत्र के साथ चढ़ाए कुछ तुलसी दल, और तुलसी की परिक्रमा।
तुलसी विवाह पर किन बातों का ध्यान रखें?
- परंपरा में एकादशी और द्वादशी को तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते, इसलिए ज़रूरत भर के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ लें।
- कई परंपराओं में शिव और गणेश को तुलसी दल नहीं चढ़ाया जाता; इस बारे में अपने परिवार की रीति मानें।
- त्योहार से पहले पौधे को साफ़ और स्वस्थ रखें। पौधा न हो तो कई घरों में तुलसी की तस्वीर या शुद्ध तुलसी दल से भी पूजा की जाती है।
Deva AI तुलसी विवाह पर कैसे मदद कर सकता है?
अगर आप घर से दूर हैं या यह पर्व आपके लिए नया है, तो Deva AI उस दिन आपका साथी बन सकता है। आप विष्णु या कृष्ण से वृंदा और शालिग्राम की कथा सरल हिंदी में पूछ सकते हैं, वर्चुअल पूजा में दीया जला सकते हैं और जप काउंटर से विष्णु मंत्र गिन सकते हैं। यह शास्त्र और परंपरा से प्रेरित AI साथी है, आपके परिवार की रीति या पंडित जी की सलाह का विकल्प नहीं।
तुलसी विवाह के बाद कौन से पर्व आते हैं?
तीन दिन बाद, मंगलवार 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली है। उसकी तारीख, मुहूर्त और दीपदान की विधि के लिए देव दीपावली 2026 का लेख पढ़ें। उससे पहले की दिवाली-कड़ी के लिए गोवर्धन पूजा और भाई दूज 2026 देखें।
दक्षिण भारत में इसी पूर्णिमा पर कार्तिगई दीपम मनाया जाता है; इसके बारे में अंग्रेज़ी का यह लेख पढ़ सकते हैं, और तेलुगु घरों के पवित्र महीने पर कार्तिक मासम 2026 का लेख है। तुलसी विवाह की अंग्रेज़ी गाइड यहां है।
निष्कर्ष
तुलसी विवाह 2026 में शनिवार, 21 नवंबर को है (ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार), और शाम का मुहूर्त लगभग 5:24 से 8:46 बजे तक बताया गया है। तुलसी को सजाएं, विष्णु का स्मरण करें और श्रद्धा से विवाह की रस्म निभाएं। समय अपने शहर के पंचांग से एक बार ज़रूर मिला लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तुलसी विवाह 2026 में कब है?
ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार तुलसी विवाह 2026 में शनिवार, 21 नवंबर को है, यानी कार्तिक शुक्ल द्वादशी के दिन। देवउठनी एकादशी इससे एक दिन पहले, शुक्रवार 20 नवंबर को पड़ती है। कुछ परिवार एकादशी के दिन भी विवाह करते हैं, इसलिए अपने घर या मंदिर की परंपरा देख लें।
तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त क्या है?
द्वादशी तिथि 21 नवंबर को सुबह करीब 6:31 बजे से शुरू होती है। शाम के प्रदोष काल का मुहूर्त कई पंचांगों में लगभग 5:24 से 8:46 बजे (IST) तक दिया गया है, जबकि दिल्ली के लिए यह थोड़ा छोटा, करीब 5:25 से 7:49 बजे तक है। अपने शहर का समय पंचांग में देख लें।
तुलसी विवाह क्यों किया जाता है?
तुलसी को लक्ष्मी का रूप माना जाता है और पुराणों में उन्हें वृंदा से जोड़ा गया है। इस दिन उनका विवाह शालिग्राम रूप में विष्णु से कराया जाता है। इसे चातुर्मास के समापन और विवाह के मौसम की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है।
तुलसी विवाह की पूजा में क्या सामग्री चाहिए?
एक स्वस्थ तुलसी का पौधा, शालिग्राम या कृष्ण-विष्णु की मूर्ति या तस्वीर, लाल कपड़ा और चूड़ियां, गेंदे की माला, दीपक, धूप, हल्दी, कुमकुम, गन्ना और फल। कई घरों में गन्ने से छोटा मंडप बनाया जाता है।
क्या तुलसी विवाह सुबह किया जा सकता है?
हां, कई परिवार द्वादशी के दिन सुबह पूजा करते हैं। वैसे विवाह की रस्म परंपरा से शाम को सूर्यास्त के बाद की जाती है। मुख्य बात द्वादशी का दिन है।
क्या Deva AI से तुलसी विवाह की कथा समझी जा सकती है?
हां। Deva AI में आप विष्णु या कृष्ण से इस पर्व की कथा और अर्थ अपनी भाषा में पूछ सकते हैं, वर्चुअल पूजा में दीया जला सकते हैं और जप काउंटर से मंत्र गिन सकते हैं। यह ऐप परंपरा से प्रेरित साथी है, पंडित जी या आपके परिवार की रीति का विकल्प नहीं।



